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कैसे हुआ मध्य प्रदेश की स्थापना और कब हुआ

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कैसे हुआ मध्य प्रदेश स्थापना स्थापना  1 ) आधारभूत तथ्य —  तारीख और स्थान मध्य प्रदेश MP india  मध्य प्रदेश का आधुनिक रूप 1 नवम्बर 1956 को आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया। उसी दिन राज्य का प्रशासनिक मुख्यालय भोपाल चुना गया और यह दिन आज मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस (Foundation Day) माना जाता है।  2) क्यों और किसने (कानूनी-नैतिक रूप से) — निर्णय लेने वाली व्यवस्थाएँ इस निर्माण का मुख्य कारण था भारत के राज्यों की भाषा-आधारित/प्रशासनिक पुनर्संरचना। इसके लिए केंद्र सरकार ने एक औपचारिक जांच-समिति बनवाई — States Reorganisation Commission (SRC) — जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति फ़ज़ल अली ने की। इस आयोग ने 1955 में अपनी सिफारिशें दीं। आयोग की सिफारिशों के आधार पर संसद ने States Reorganisation Act, 1956 पारित किया और उस कानून के लागू होते ही 1 नवम्बर 1956 से नए राज्य-आकृतियों का क्रियान्वयन हुआ। यानी निर्णय आयोग की सिफारिश + संसद (कानून) + केंद्र सरकार के क्रियान्वयन से हुआ।  3) स्टेप-बाय-स्टेप — गठन की प्रक्रिया (सिंपल क्रम में)...

झाबुआ में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश ने पूरे जिले का नजारा बदल दिया है।

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झाबुआ में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश ने पूरे जिले का नजारा बदल दिया है। चारों तरफ हरियाली छा गई है, खेतों में पानी भर गया है और नदी-नाले उफान पर हैं। यह बारिश लोगों के लिए राहत भी लाई है और कुछ जगहों पर परेशानी का कारण भी बनी हुई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि झाबुआ में तीन दिन से लगातार जारी इस बारिश का असर लोगों की ज़िंदगी, फसलों और प्रशासन पर कैसा पड़ा है। 🌧️ लगातार तीन दिन की बरसात: मौसम का मिजाज बदला झाबुआ जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार रुक-रुक कर बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, इस अवधि में जिले में औसतन 100 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। सुबह से लेकर रात तक कहीं न कहीं बादल गरजते रहते हैं और हल्की से मध्यम वर्षा होती रहती है। तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश ने तापमान में भी गिरावट कर दी है, जिससे मौसम सुहावना हो गया है। 🌾 खेती-किसानी पर असर इस बारिश ने किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी है। जो खेत सूखने की कगार पर थे, उनमें अब पानी भर गया है। कपास, सोयाबीन, मक्का और तुअर जैसी फसलों को इस बरसात से नई जान मिल गई है। जिन फसलों में पहले कीट या सूखने का डर...
 गाय गोहरी पूजा मुख्य रूप से मध्य प्रदेश (विशेष रूप से झाबुआ, धार, बड़वानी) और गुजरात के दाहोद जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में दीपावली के दूसरे दिन या गोवर्धन पूजा के अवसर पर मनाया जाने वाला एक अनूठा और महत्वपूर्ण आदिवासी रीति-रिवाज है। यह पर्व गायों और ग्वालों के प्रति प्रेम, आस्था और कृतज्ञता का प्रतीक है। यहां गाय गोहरी पूजा के आदिवासी रीति-रिवाजों का विवरण बिंदुओं में दिया गया है: 1. पर्व का समय और महत्व (Time and Importance):  * समय: यह पर्व सामान्यतः दीपावली के अगले दिन या दूसरे दिन (यानी गोवर्धन पूजा/नव वर्ष के दिन) मनाया जाता है।  * उद्देश्य: यह मुख्य रूप से गौवंश (गाय और बैल) के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करने, उनकी पूजा करने और पशुधन की रक्षा के लिए देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने का त्योहार है। यह आदिवासी संस्कृति, एकता और परंपरा का प्रतीक है। 2 . पर्व की तैयारी और सजावट (Preparation and Decoration) :  * सजावट: त्यौहार के एक दिन पहले से ही गायों और बैलों को अच्छे से नहलाया जाता है।  * रंग और मेंहदी: पशुओं के शरीर पर विभिन्न रंगों और मेंहदी (हेन्ना) ...

मुकेश भाई वास्कले ने न्यू कार ली बड़ी मेहनत से लिया है

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 यह सिद्ध करता है कि सच्ची लगन, ईमानदारी और कठोर परिश्रम से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। चूंकि मेरे पास मुकेश भाई वास्कले के जीवन की विशिष्ट  मेहनत और लगन की मिसाल: मुकेश भाई वास्कले का कार खरीदने का सपना यह कहानी है मुकेश भाई वास्कले की, जिनके हाथों की रेखाओं में सिर्फ पसीना नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प की स्याही घुली हुई थी। मुकेश भाई उस भारत के प्रतिनिधि हैं, जो शहरों की नींव रखता है, खेतों में सोना उगाता है, और सड़कों को आकार देता है—यानी एक मज़दूर। उनकी कहानी महज़ एक कार खरीदने की नहीं है, बल्कि स्वाभिमान, त्याग और धैर्य की एक जीती-जागती मिसाल है। संघर्ष के दिन और एक अटूट सपना मुकेश भाई वास्कले का जीवन हमेशा संघर्षों से घिरा रहा। उनका परिवार एक छोटे से गाँव में रहता था, जहाँ रोज़ की मज़दूरी ही आय का एकमात्र स्रोत थी। उन्हें रोज़ सुबह तड़के उठकर मज़दूर चौक पर जाना पड़ता था, जहाँ काम मिलने की गारंटी नहीं होती थी। कई दिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने निर्माण स्थलों पर काम किया, भारी ईंटें ढोईं, तपती धू...

सड़क दुर्घटना: अलीराजपुर के जोबट में बाइक दुर्घटना में एक युवक की मौत

1. सड़क दुर्घटना: अलीराजपुर के जोबट में बाइक दुर्घटना में एक युवक की मौत अलीराजपुर जिले के जोबट क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना सामने आई, जिसने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। यह घटना गुडा गांव के पास हुई, जहाँ दो तेज रफ्तार मोटरसाइकिलें आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक युवा, जिसकी पहचान एमएससी की पढ़ाई कर रहे युवक के रूप में हुई है, की मौके पर ही मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार, मृतक युवक टेमाची गांव का निवासी था और इंदौर से अपने गांव लौट रहा था। इस दुर्घटना में दोनों बाइकों पर सवार दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही जोबट थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव का पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने को दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय सड़कों पर यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता और युवाओं के बीच स...

धनतेरस की सभी देशवासियों को हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं 💐🙏

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धनतेरस की सभी देशवासियों को हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं 🌼 धनतेरस की शुभकामनाएँ – उजाले और समृद्धि का संदेश 🌟 1. धनतेरस का अर्थ और आरंभ धनतेरस शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘धन’ का अर्थ है संपत्ति, समृद्धि और सुख, और ‘तेरस’ का अर्थ है महीने की तेरहवीं तिथि। इस दिन को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। 🌸 “जहाँ दीप जले, वहाँ आशा मुस्कराए, धनतेरस का दिन सौभाग्य लेकर आए।” यह दिन दीपावली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन से ही पूरे भारत में उजालों का पर्व शुरू हो जाता है। 🌿 2. धनतेरस का धार्मिक महत्व पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए यह दिन आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरि को समर्पित है। 🌺 “धन्वंतरि आए कलश लेकर, जीवन में भर दें आरोग्य का सागर।” इसके साथ ही धन के देवता कुबेर और माँ लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। लोग इस दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। 🪔 3. शुभ कार्य और खरीदारी का महत्व धनतेरस पर नया सोना, चांदी, बर्तन या इलेक्ट्रॉनिक...

शिक्षा से वंचित बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना – एजुकेट गर्ल्स की प्रेरणादायक पहल झाबुआ

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  झाबुआ -   शिक्षा से वंचित बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना – एजुकेट गर्ल्स की प्रेरणादायक पहल झाबुआ  भारत के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आज भी अनेक बच्चियां ऐसी हैं जिन्हें स्कूल तक पहुंचने का अवसर नहीं मिला। गरीबी, सामाजिक परंपराएं और जागरूकता की कमी के कारण लाखों बेटियां शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। इन्हीं बेटियों को शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए एक संस्था ने गांव-गांव तक कदम बढ़ाया है — “एजुकेट गर्ल्स” (Educate Girls)।  यह संस्था न केवल बच्चियों को स्कूल तक पहुंचाती है, बल्कि परिवारों और समुदायों की सोच में भी गहरा बदलाव लाने का काम कर रही है। 🌼 एजुकेट गर्ल्स अभियान की शुरुआत और उद्देश्य एजुकेट गर्ल्स की स्थापना वर्ष 2007 में सफीना हुसैन द्वारा की गई थी। उन्होंने देखा कि भारत के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की सबसे अधिक कमी बालिकाओं में है। इसलिए इस संस्था का मुख्य उद्देश्य बना — 👉 “हर बेटी स्कूल जाए, कोई बच्ची शिक्षा से वंचित न रहे।” संस्था का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में फैला हु...

जिला अस्पताल में अव्यवस्था के खिलाफ आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष श्री कमलेश सिंगाड़ के अभियान और मरीजों की परेशानियों पर एक विस्तृत लेख प्रस्तुत है।

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  जिला अस्पताल में अव्यवस्था के खिलाफ आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष श्री कमलेश सिंगाड़ के अभियान और मरीजों की परेशानियों पर एक विस्तृत लेख प्रस्तुत है। झाबुआ जिला अस्पताल: अव्यवस्था के खिलाफ कमलेश सिंगाड़ का संघर्ष और मरीजों का दर्द झाबुआ, मध्य प्रदेश का एक आदिवासी बहुल जिला, जहाँ का जिला अस्पताल सैकड़ों गाँवों और कस्बों के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। लेकिन यह अस्पताल लंबे समय से व्यवस्थागत खामियों, संसाधनों की कमी और मरीजों को होने वाली दिक्कतों के कारण सुर्खियों में रहा है। इसी अव्यवस्था के खिलाफ एक सशक्त और मुखर आवाज बनकर उभरे हैं आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष श्री कमलेश सिंगाड़। उनका निरंतर अभियान और मरीजों की परेशानियों को उजागर करने का प्रयास अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। मरीजों की वह दयनीय स्थिति जो बनी अभियान की बुनियाद कमलेश सिंगाड़ का यह अभियान किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं, बल्कि आम जनता, विशेषकर गरीब और आदिवासी मरीजों की सुनी-अनसुनी पीड़ा से जन्मा है। झाबुआ जिला अस्पताल में आए दिन होने वाली समस्याएं एक गंभीर चिंता का विषय हैं: 1....

RSS कि झाबुआ में भव्य रैली कॉलेज ग्राउंड से लेकर राजवाड़ा तक

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झाबुआ में हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक भव्य रैली आयोजित की गई। यह आयोजन समाज में एकजुटता और राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। रैली का प्रारंभ सुबह के समय हुआ, जब झाबुआ शहर के मुख्य मार्गों पर सजावट की गई थी। रास्तों को फूलों और झंडों से सजाया गया था, जिससे रैली का माहौल उत्सव जैसा लग रहा था। रैली की शुरुआत में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया। उन्होंने लोगों को संघ के उद्देश्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बारे में बताया। रैली का मुख्य संदेश था कि समाज में नैतिकता, संस्कृति और एकता को बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। रैली में झाबुआ के छोटे-बड़े सभी लोग शामिल हुए। इसमें छात्र, शिक्षक, व्यापारी, किसान, महिलाएँ और बुजुर्ग सभी मौजूद थे। लोग अपने-अपने परिवार के साथ आए थे और उन्होंने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। रैली में बच्चों की भी विशेष भागीदारी रही, जिन्होंने अपने हाथों में झंडे और पोस्टर लिए थे। पोस्टरों पर देशभक्ति और सामाजिक संदेश लिखे हुए थे। रैली में शामिल लोगों ने राष्ट्रीय गान गाया और...

प्रधानमंत्री की 62,000 करोड़ रुपये की नई योजनाएँ : युवाओं के लिए बड़ा ऐलानभारत में आज का दिन युवाओं के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री की 62,000 करोड़ रुपये की नई योजनाएँ : युवाओं के लिए बड़ा ऐलान भारत में आज का दिन युवाओं के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के लिए 62,000 करोड़ रुपये की नई योजनाओं का ऐलान किया है। यह कदम शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को मज़बूत करने के लिए उठाया गया है। सरकार का मानना है कि 21वीं सदी का भारत तभी प्रगति करेगा, जब उसकी युवा शक्ति सही दिशा में आगे बढ़ेगी। 1. योजना का उद्देश्य सरकार ने यह साफ किया है कि इस राशि का मुख्य फोकस युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगार-योग्य बनाना है। शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएँ देना डिजिटल स्किल और नई तकनीक की ट्रेनिंग उद्यमिता (Entrepreneurship) को बढ़ावा ग्रामीण और शहरी युवाओं के बीच अवसरों की बराबरी स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों को सहयोग 2. शिक्षा में बड़ा निवेश कुल 62,000 करोड़ में से एक बड़ा हिस्सा शिक्षा व्यवस्था सुधार पर खर्च होगा। इसमें सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, स्मार्ट क्लासरूम बनाने और डिजिटल लाइब्रेरी उपलब्ध कराने की योजना है। ग्रामीण इलाकों में विशेष ध्यान दिया...